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इकतरफा

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इश्क़ भी इकतरफा, दिल का धड़कना भी इकतरफा,
जो देखा था इन आंखों ने तुझे एक जमाने पहले
वोह देखना भी सिर्फ और सिर्फ इकतरफा
तुझसे बिछड़े, तो टूट के बिखर जाने का दर्द भी इकतरफा

किताबो के पीले पन्नो मैं रखी,
धुन्धलIती तस्वीर से बोलती तेरी आंखों मैं,
मेरे इश्क़ की परछाईं इकतरफा
टूट के बिखर जाने का दर्द भी हाय इकतरफा

इक समय जिस हंसी पर मरा करते थे
जो तुम्हारे लबो से हमारे दिल तक उतर जाती थी
उस हसीं याद से हमारे दिल का धड़कना इकतरफा
टूट के बिखर जाने का दर्द भी हाय इकतरफा

सदियों का फासला तय कर चुका हैं अकेले
न तब और न अब, कह पाए दिल का हाल
वोह दिलो की गहराइयों का अकेलापन इकतरफा
टूट के बिखर जाने का दर्द भी हाय इकतरफा

वोह छुपछुप कर तुझे देखना इकतरफा
इश्क़ भी इकतरफा, दिल का धड़कना भी इकतरफा,
टूट के बिखर जाने का दर्द भी हाय इकतरफा

………………………………..। रश्मि ।

Mahek

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एक कविता प्यार के नाम की, प्यार के अहसास की, प्यार की महक, ख़ुशबू से परिपूर्ण. अपनी आवाज़ में पिरोयी हुई, प्यार के नाम, सुनीयेगा ज़रूर

Dua

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Ek arsa hua tumhe gaye,

Ek arsa hua hume, jeeye jeeye,

Jab tum the, haste the saath, jindagi bhi ji,

Ankhon se tapkti, tumhari chanchal, hasi bhi pi,

Betahasha palo ko, humne youn guzarne diya,

Bus un lamho ko, dil ki tijori main kaid hi na kiya,

Kehne ko to waqt hi hai, gujar gaya,

Har pal, apne main kai lambi sadiya liye.

 

Pata hota ki tum chale jaoonge,

To band kar muthi main rakh leti unhe,

Tumhari har chuan ko, rom rom main bher leti main,

Har pyar, har takrar, har shararat, har ek nazar ko,

Dil ki gahariyon se jakad leti main,

Bahut mushkil hain jeena tumhare bin,

In siskiyon main, tumhari awaz sun leti kahi,

Bus youn hi  kuch aur tumhe, jee leti thi main.

 

Kaash pal do pal, aur tumhara saath hota,

Apni jindagi main, chaar pal aur jod leti main,

Woh chaar pal, jinke sahare, sadiyan gujaar leti,

Khud jeeti aur tumhe murat main utar leti,

Ek halka abhaas bhi hota, ki itna hi saath hamara,

Khuda se tumhe, aur maang leti main,

Duan main tumhe maang leti thi main.

 

बात दोस्ती की एक नए अंदाज़ मैं …. A conversation between four friends

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बात दोस्तों मैं उठी एक शाम, ऐसे ही,

और समां बंध गया ऐसा,

पुराने  दोस्तों की बाते,  दोस्तों के नाम 

शब्दों मैं बंधी,  मिलीजुली रचाएँ  चार दोस्तों की 

 

Pehli Rachna thi Seher…aur uske baad silsila chal pada…

 

jindagi kabtak yun hi raabta hogi,

chalegi yuhin par kab tak aashna hogi, 

lagta hain sab ko hum khade hain makam par, 

par yeh jindagi na jane kab hum se hi saamna hogi, 

chale jaate hain, bahe jaate hain, bikhare bhi jaate hain, 

thum ja yahi, yahi teri sabr ka, seher ka, agaaz hogi  ……………….Rashmi

 

Jo abtak guzari Uska Malal Nahin,

honsala hai ki aage kuch to kasar baaki hogi…………Nirjara

 

Honsala hota hi itna to malal nahi 

Par jibdagi ab tak Jo gujari hain

Uska dum ab Saath nahi

Na chal paayenge aur ab,

Dilo main khwaish Bhi nakam rahi……………..Rashmi

 

Labon par khudah ka ilm hai jab tak yaara,

Rago Mai daudane ki garmi hogi…………Nirjara

 

Ragon mein daudte phirne ke hum nahin kaayal ..

Jab aankh hi se na tapka to phir lahoo kya hai …….Ritu Quoted Mirza Galib

 

Zindagi guzar jayegi bagal Mai rah kar yoon hi. 

Ab to lagta hai Tere ghar direct tapkane ke jurrat hi Karni hogi…………Nirjara

 

Gar jurrart ki Jo aapne

Aap ke Saath hum Bhi ho lenge

Aap Jo lotenge ghar ko vaapis 

Aap ke Saath Kuch naye pal Bhi ho lenge

Kuch purani Yaado par tumahari…. Hum Aaj Bhi fida hain..

Jo bitaaye Saath naye pal… Aur nagme Bhi Saath ho lenge…………….Rashmi

 

“Chale jaate hain ,bahe jaate hain , bikhare bhi jaate hain “

sambhal yaaran , ab kuch pal khudh ke liye kaseedne ki jurrat hogi……………..Nirjara

 

रुई का गद्दा बेचकर दरी खरीद ली,

ख्वाहिशो को कम किया और ख़ुशी खरीद ली !

सबने ख़रीदा सोना मेने सुई खरीद ली

सपनो को बुनने जितनी डोर खरीद ली 

इस ज़माने से सौदा कर एक ज़िन्दगी खरीद ली,

दिनों को बेचा और शामे खरीद ली !

रुई का गद्दा बेचकर दरी खरीद ली,

ख्वाहिशो को कम किया और ख़ुशी खरीद ली !…………….Energyia

 

apni woh Sui to udhaar de yaar. 

Abtak ki bunaayi aadh-kachchi loon mein sawaar. 

Kuch nayi bunoo kabhi purani loon udhaarh. 

Bharosa hai mujhe ki yeh dor sulajh hi jaayegi ……………………Nirjara

 

Had fun after years…Enjoy

 

 

Seher

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jindagi kab hum se raabta hogi,
chalegi yuhin par kab tak na aashna hogi, 
lagta hain sab ko hum khade hain makam par, 
par yeh jindagi na jane kab hum se hi saamna hogi, 
chale jaate hain, bahe jaate hain, bikhare bhi jaate hain, 
thum ja yahi, yahi tere sabr ka, seher ka, agaaz hoga

तार तार

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तार तार, तार तार

आँचल उसका तार तार

मैला दामन, लहूलुहान जिस्म

रोता उस का रोम रोम

चीख चीख बस यही सवाल

क्यों तार तार , क्यों तार तार

 

स्त्री को यूँ तो पूजा कितने रूपों मैं

किसी की बेटी, किसीकी बहिन

किसीकी प्रियतमा , किसी की माँ

कई रूप मैं देखा, कई रूप मैं जाना

पर फिर क्यों तार तार, क्यों तार तार

 

जब नज़र उठाई उसकी ओर ,

क्यों न देखा एक इन्सान हैं वो

जब हाथ डाले उसके दामन पर

क्यों न सोचा किसी का परिवार हैं वो

क्यों दरिंदगी का खेल यों खेला

क्यों तार तार, क्यों तार तार

 

कहने को हैं कितना कुछ,

आक्रोश, भी हैं, घुटन भी हैं

स्त्री के साथ होते इन कुकर्मों,

के प्रति अथाह घ्रीणा भी हैं

उन दरिंदो के हाथ चीरे कितने ही दामन

क्यों तार तार, क्यों तार तार

 

रोता हैं ह्रदय, घुटता हैं मन

आज की इस दुनिया मैं

क्यों होता हैं एक स्त्री के संग, यह सब

न उम्र का लिहाज, न इंसानी जज्बे का

न जाने बंद होगा यह सब, जाने कब

क्यों तार तार, क्यों तार तार

चेहरे

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जाने पहचाने चेहरे

उत्साह तरंगित करते चेहरे

 

गमो के साये से परेशान

कु छ भोले भाले चेहरे

मर्म को ना समझ पाते चेहरे

हाँ, यह जाने पहचाने चेहरे

 

ह्रदय की अभिलाषाओं  का प्रतीक

उत्साह की तरंगे उमडती होती प्रतीत

आशा के मोहजाल को दर्शाते चेहरे

सच यह जाने पहचाने चेहरे

 

विविध भावों का संगम

जिंदगी का तरनुम

बस एक गीत एक लय से थिरकते चेहरे

कुछ जाने पहचाने चेहरे

 

जो समझे ह्रदय की मूक भाषा को

जो दे  दे नाम इसकी परिभाषा को

वही हैं सही मायने मैं साथी चेहरे

कितने प्यारे जाने पहचाने चेहरे

 

प्रणय  प्यार स्नेह दर्शाते

आँखों के पैमाने से कुछ कह जाते

सच तो यह हैं मयखाने चेहरे

सुन्दर जाने पहचाने चेहरे

 

उजड़ने व् बसने का

प्राचीन इतिहास छुपाये

वक्त  के साथ नित नयी मूरत बनाए

इतिहास के पन्नों से उज्जवल यह चेहरे

स्वर्णिम आभा से धुले

यह जाने पहचाने चेहरे

 

सजल शुब्ध , अंगारे सी लगती हैं

इनमे एक ज्वाला भी जलती हैं

कभी शोला तो कभी शबनम

आंसुओं के मिलन का संगम

निस दिन नए राग गाते

जाने पहचाने चेहरे

 

समय के साथ बदलते

बचपन से बुढापे तक चलते

यह पावन व् निर्मल चेहरे

अंत मैं मृत्यु की गोद  मैं सो जाते

चिर निद्रा मैं मग्न जाने पहचाने चेहरे

 

कर ही रही हूँ जब  चेहरों की बात

तब क्यों कर ना बता दू मैं यथार्थ

हाँ! हैं कुछ चेहरे

ऊपर से लगाए हैं स्नेह के दिखावटी चेहरे

 

खेलते हैं ऐंसा मनभावों से, प्यार से

पर सच तो हैं,

ना देखी इतनी अमानवीयता

न देखी इतनी क्रूरता

हँसते रहंगे घिनोने चेहरे

 

उत्साह क्षीण करते चेहरे

जाने पहचाने चेहरे